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मंत्र संग्रह

Sanatan Gyaan Manthan के इस 'मन्त्र संग्रह' (Mantra Sangrah) सेक्शन में आपका स्वागत है। सनातन धर्म में मन्त्रों का विशेष महत्व है। मन्त्र केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि ये वे ब्रह्मांडीय ध्वनियाँ हैं जो हमारे मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करने की शक्ति रखती हैं। प्राचीन ऋषियों और मुनियों ने हमें ऐसे दिव्य मन्त्र दिए हैं जिनका सही उच्चारण और जाप करने से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं दूर हो सकती हैं। हमारे इस संग्रह में आपको सभी देवी-देवताओं के शक्तिशाली मन्त्र (Powerful Hindu Mantras) विस्तार से मिलेंगे। यहाँ हमने न केवल मन्त्रों के लिरिक्स (Mantra Lyrics) दिए हैं, बल्कि उनके गहरे अर्थ और जाप करने की सही विधि (Mantra Jaap Vidhi) भी साझा की है। चाहे आप मानसिक शांति के लिए गायत्री मन्त्र (Gayatri Mantra) ढूंढ रहे हों, रोगों से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय मन्त्र (Mahamrityunjay Mantra), या फिर सुख-समृद्धि के लिए लक्ष्मी मन्त्र; यहाँ आपको सब कुछ एक ही जगह पर मिलेगा। मन्त्र जाप के लाभ (Benefits of Mantra Chanting): शास्त्रों के अनुसार, मन्त्रों का जाप करने से एकाग्रता बढ़ती है, नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास होता है। हमारे 'Mantra Sangrah' में आपको वैदिक मन्त्रों से लेकर बीज मन्त्रों तक की पूरी जानकारी मिलेगी, जो आपकी दैनिक पूजा-पाठ को और भी प्रभावशाली बनाएगी। शुद्ध उच्चारण और सही विधि-विधान के साथ मन्त्रों की शक्ति को अपने जीवन में उतारने के लिए इस पेज को नियमित रूप से पढ़ें। हम यहाँ समय-समय पर नए मन्त्र और उनके रहस्यों को जोड़ते रहते हैं ताकि आपको Shuddh Sanatan Gyaan प्राप्त होता रहे।

रविवार का दिन श्रष्टी के प्रत्यक्ष देव भगवान सूर्य को समर्पित है। इसके साथ-साथ शुद्ध उच्चारण के करते हुए आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ भी अवश्य करना चाहिए। भगवान सूर्यदेव के मंत्र – ॐ ऐहि सूर्य सह...

त्वंपुरा सागरोत्पन्न विष्णुनाविघृतःकरे । देवैश्चपूजितः सर्वथौपाच्चजन्यमनोस्तुते ॥सरल भाव: त्वं पुरा सागरोत्पन्न विष्णुना विधृत: करे । देवैश्चपूजितः सर्वथौ पाञ्चजन्य नमोऽस्तु ते ॥ Shankh Poojan Mantra ...

अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् । नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम् ॥ इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा । सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान् ॥ मन्वादीनां मुनीन्द्राणा...

ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च । नमः स्वाहायै स्वाधायै नित्यमेव नमो नमः ॥ ॐ पितृभ्यो नमः ॥ —–मंत्र का मूल रूप——– ॐ सिद्धमिदमासनमिह सिद्धमित्यभिधाय ॐ भूः ॐ भुवः ॐ ...

श्री कृष्णाष्टोत्तरशत नामावलिः कृष्ण – ॐ कृष्णाय नमः । कमलनाथ – ॐ कमलनाथाय नमः । वासुदेव – ॐ वासुदेवाय नमः । सनातन – ॐ सनातनाय नमः । वसुदेवात्मज – ॐ वसुदेवात्मजाय नमः । प...

॥ जानकीकृतं पार्वतीस्तोत्रम् ॥ जानकी उवाच: शक्तिस्वरूपे सर्वेषां सर्वाधारे गुणाश्रये । सदा शंकरयुक्ते च पतिं देहि नमोsस्तु ते ॥1॥ सृष्टिस्थित्यन्त रूपेण सृष्टिस्थित्यन्त रूपिणी । सृष्टिस्थियन्त बीजाना...

॥ अथ श्रीलक्ष्मीसहस्रनामावलिः ॥ ॐ नित्यागतायै नमः । ॐ अनन्तनित्यायै नमः । ॐ नन्दिन्यै नमः । ॐ जनरञ्जिन्यै नमः । ॐ नित्यप्रकाशिन्यै नमः । ॐ स्वप्रकाशस्वरूपिण्यै नमः । ॐ महालक्ष्म्यै नमः । ॐ महाकाल्यै न...

पीताम्बर: पीतवपु: किरीटी, चतुर्भुजो देवगुरु: प्रशान्त: । दधाति दण्डं च कमण्डलुं च, तथाक्षसूत्रं वरदोsस्तु मह्यम ॥1॥ नम: सुरेन्द्रवन्द्याय देवाचार्याय ते नम: । नमस्त्वनन्तसामर्थ्यं देवासिद्धान्तपारग ॥2...

प्रथमेनार्जिता विद्या, द्वितीयेनार्जितं धनं । तृतीयेनार्जितः कीर्तिः, चतुर्थे किं करिष्यति ॥ सरल रूपांतरण: प्रथमे नार्जिता विद्या, द्वितीये नार्जितं धनम् । तृतीये नार्जितं पुण्यं, चतुर्थे किं करिष्यति...

॥ श्री अय्यप्प अष्टोत्तरशतनामावलिः ॥ ॐ महाशास्त्रे नमः । ॐ महादेवाय नमः । ॐ महादेवसुताय नमः । ॐ अव्ययाय नमः । ॐ लोककर्त्रे नमः । ॐ लोकभर्त्रे नमः । ॐ लोकहर्त्रे नमः । ॐ परात्पराय नमः । ॐ त्रिलोकरक्षका...

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