सनातन धर्म में भगवान शिव के अनेक स्वरूपों का वर्णन मिलता है। उनका एक ऐसा ही अद्भुत और रहस्यमयी स्वरूप है भगवान काल भैरव। काल भैरव का नाम सुनते ही एक ओर भक्तों के मन में श्रद्धा जागती है, तो दूसरी ओर उनके उग्र स्वरूप की कल्पना भी सामने आती है। उन्हें ...
भारत में ऐसे अनेक प्राचीन मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी मान्यताएं और रहस्य आज भी लोगों को हैरान करते हैं। कुछ मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध हैं, तो कुछ अपनी अनोखी धार्मिक परंपराओं और रहस्यमयी घटनाओं के कारण लोगों के बीच चर्...
नेपाल की हिमालयी धरती केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि यहां ऐसे अनेक धार्मिक स्थल हैं जिनका संबंध हिंदू और बौद्ध दोनों परंपराओं से रहा है। इन्हीं पवित्र स्थलों में से एक है मुक्तिनाथ मंदिर, जिसे हिंदू धर्म ...
हिमाचल प्रदेश को यूं ही देवभूमि नहीं कहा जाता। यहां की ऊंची-ऊंची पर्वत चोटियों, घने जंगलों और शांत वातावरण के बीच ऐसे अनेक प्राचीन मंदिर मिलते हैं, जिनसे जुड़ी पौराणिक कथाएं आज भी लोगों को आकर्षित करती हैं। हिमाचल के लगभग हर क्षेत...
रामायण की कथाओं में भगवान श्रीराम, माता सीता और महाबली हनुमान की भक्ति और पराक्रम के अनेक प्रसंग मिलते हैं। लेकिन हनुमान जी की शक्ति से जुड़ी कुछ ऐसी कथाएं भी प्रचलित हैं, जिन्हें सुनकर मन में एक ही विचार आता है—जिस हनुमान जी को स...
सनातन धर्म में भगवान शिव के अनेक स्वरूपों का वर्णन मिलता है। उनका एक ऐसा ही अद्भुत और रहस्यमयी स्वरूप है भगवान काल भैरव। काल भैरव का नाम सुनते ही एक ओर भक्तों के मन में श्रद्धा जागती है, तो दूसरी ओर उनके उग्र स्वरूप की कल्पना भी स...
भारतीय सनातन परंपरा में चारों वेदों को ज्ञान का मूल स्रोत माना गया है। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद—इन चारों वेदों में धर्म, यज्ञ, ज्ञान, जीवन और सृष्टि से जुड़े अनेक विषयों का वर्णन मिलता है। इसीलिए कल्पना कीजिए कि यदि कि...
जब भक्त बुलाते हैँ जब भक्त बुलाते हैँ, हरि दौड़ के आते हैँ ॥ वो तो दीन और दुःखीओं को ॥ आ के गले लगाते हैँ, हरि दौड़ के आते हैँ, जब भक्त बुलाते हैँ… द्रोपदी ने जब, उन्हें पुकारा, दौड़े दौड़े आ गए । भरी सभा में, चीर बढ़ा के, उसकी लाज बचा गए...
श्री रामायण प्रारम्भ स्तुति जो सुमिरत सिधि होइ गन नायक करिबर बदन ॥ करउ अनुग्रह सोइ बुद्धि रासि सुभ गुन सदन ॥ 1 ॥ मूक होइ बाचाल पंगु चढइ गिरिबर गहन ॥ जासु कृपाँ सो दयाल द्रवउ सकल कलि मल दहन ॥ 2 ॥ नील सरोरुह स्याम तरुन अरुन बारिज नयन ॥ करउ सो मम...






















