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आरती संग्रह

आरती, भगवान की भक्ति और स्तुति का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। यह भक्तों द्वारा भगवान के प्रति श्रद्धा और प्रेम व्यक्त करने का एक तरीका है। आरती में भगवान के नामों का जाप, उनकी महिमा का वर्णन और उनसे आशीर्वाद की प्रार्थना शामिल होती है। Sanatan Gyaan Manthan पर आरती संग्रह में विभिन्न देवी-देवताओं की आरतीयाँ शामिल हैं। इनमें से कुछ प्रमुख आरतीयाँ हैं: श्री गणेश आरती श्री राम आरती श्री कृष्ण आरती श्री हनुमान आरती श्री दुर्गा आरती शिव आरती शिव पंचाक्षर आरती महाआरती आरती संग्रह में आरतीयाँ विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध हैं, जैसे कि हिंदी, संस्कृत, गुजराती, मराठी और तमिल। आरती संग्रह के लाभ: आरती संग्रह विभिन्न देवी-देवताओं की आरतीयाँ एक ही स्थान पर प्रदान करता है। आरती संग्रह में आरतीयाँ विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध हैं, जिससे भक्त अपनी पसंदीदा भाषा में आरती कर सकते हैं। आरती संग्रह में आरतीयाँ ऑडियो और वीडियो दोनों रूपों में उपलब्ध हैं, जिससे भक्त अपनी सुविधानुसार आरती कर सकते हैं। आरती संग्रह का उपयोग कैसे करें: आप Sanatan Gyaan Manthan की वेबसाइट पर आरती संग्रह से आरतीयाँ पढ़ सकते हैं, सुन सकते हैं और डाउनलोड कर सकते हैं। आप आरती संग्रह से आरतीयाँ अपने मोबाइल फोन या टैबलेट पर भी डाउनलोड कर सकते हैं। आप आरती संग्रह से आरतीयाँ अपने परिवार और दोस्तों के साथ भी साझा कर सकते हैं। आरती संग्रह Sanatan Gyaan Manthan की एक महत्वपूर्ण सेवा है। यह भक्तों को भगवान की भक्ति और स्तुति करने में मदद करता है। यहाँ कुछ अतिरिक्त जानकारी दी गई है जो आप आरती संग्रह के विवरण में शामिल कर सकते हैं: आरती का इतिहास और महत्व विभिन्न प्रकार की आरतीयाँ आरती करने की विधि आरती के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें धन्यवाद!

Hanuman ji

श्री हनुमान जी की आरती हिन्दी में ॥ श्री हनुमंत स्तुति ॥ मनोजवं मारुत तुल्यवेगं, जितेन्द्रियं, बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥ वातात्मजं वानरयुथ मुख्यं, श्रीरामदुतं शरणम प्रपद्धे ॥ ॥ आरती ॥ आरती कीजै हनुमान लला...

shri ganesh

श्री गणेश आरती हिन्दी में जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी । माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥ जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी प...

Shani Dev

श्री शनि देव की आरती हिन्दी में आरती कीजै नरसिंह कुंवर की । वेद विमल यश गाउँ मेरे प्रभुजी ॥ पहली आरती प्रह्लाद उबारे । हिरणाकुश नख उदर विदारे ॥ दुसरी आरती वामन सेवा । बल के द्वारे पधारे हरि देवा ॥ तीस...

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