Bhavayami Gopalabalam(भावयामि गोपालबालं)

भावयामि गोपालबालं मन-
स्सेवितं तत्पदं चिन्तयेहं सदा ॥
भावयामि गोपालबालं मन-
स्सेवितं तत्पदं चिन्तयेहं सदा ॥

कटि घटित मेखला खचितमणि घण्टिका-
पटल निनदेन विभ्राजमानम् ।
कुटिल पद घटित सङ्कुल शिञ्जितेनतं
चटुल नटना समुज्ज्वल विलासम् ॥

भावयामि गोपालबालं मन-
स्सेवितं तत्पदं चिन्तयेहं सदा ॥

निरतकर कलित नवनीतं ब्रह्मादि
सुर निकर भावना शोभित पदम् ।
तिरुवेङ्कटाचल स्थितम् अनुपमं हरिं
परम पुरुषं गोपालबालम् ॥

भावयामि गोपालबालं मन-
स्सेवितं तत्पदं चिन्तयेहं सदा ॥

भावयामि गोपालबालं मन-
स्सेवितं तत्पदं चिन्तयेहं सदा ॥
भावयामि गोपालबालं मन-
स्सेवितं तत्पदं चिन्तयेहं सदा ॥

Share Article:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सनातन ज्ञान मंथन परिवार से जुड़े

न्यूज़लेटर के लिए साइन अप करें

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

हाल के पोस्ट

  • All Post
  • आरती संग्रह
  • कथा संग्रह
  • चालीसा संग्रह
  • भजन संग्रह
  • मंत्र संग्रह
  • स्तुति संग्रह
    •   Back
    • भगवान विष्णु कथाएं
    • भगवान शिव कथाएं
    • भगवान ब्रह्मा कथाएं
    • आध्यात्मिक कथाएं
    • देवी माँ कथाएं
    • प्रसिद्ध मंदिर कथाएं
    • भगवान यमराज कथाएं
    • रामायण कथाएं
    • महाभारत कथाएं
    • श्री हनुमान कथाएं
    • श्री कृष्ण कथाएं
    • भगवान श्री गणेश कथाऐ
Edit Template

हमारे बारे में

आपका स्वागत है ‘सनातन ज्ञान मंथन’ वेबसाइट पर! यहां, हम आपको प्राचीन भारतीय साहित्य के मूल्यवान गहनों से परिचित कराएंगे। हमारी धरोहर में सीता-राम, कृष्ण-बालराम, और अर्जुन-कर्ण की अद्भुत कहानियों से लेकर महाभारत और रामायण के अनकहे पहलू तक कई रहस्यमयी कथाएं और ज्ञान छिपा है।

Copyrights © Sanatan Gyaan Manthan 2025 | About | Privacy Policy | Terms & Conditions | Managed by Redefine SEO