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कान्हा तेरी कबसे बाट निहारूं भजन हिन्दी में कान्हा तेरी कबसे, बाट निहारूं, बाट निहारू तुझे, पल पल पुकारूँ ॥ बांध ली कान्हा तोसे, प्रीत की डोरी, सुलझे ना मोसे अब, उलझन मोरी, हरदम याद सताती है, अखियां जल बरसाती है,...
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आपका स्वागत है ‘सनातन ज्ञान मंथन’ वेबसाइट पर! यहां, हम आपको प्राचीन भारतीय साहित्य के मूल्यवान गहनों से परिचित कराएंगे। हमारी धरोहर में सीता-राम, कृष्ण-बालराम, और अर्जुन-कर्ण की अद्भुत कहानियों से लेकर महाभारत और रामायण के अनकहे पहलू तक कई रहस्यमयी कथाएं और ज्ञान छिपा है।