No Comments
दोहा – भस्म रमाए बैठे है शंकर, सज धज के दरबार, कावड़िया ले आओ कावड़, राह तके सरकार ॥ कावड़िया ले चल गंग की धार, जहाँ बिराजे भोले दानी, करके अनोखा श्रृंगार, कावड़ियां ले चल गंग की धार ॥ अंग...
दोहा – भस्म रमाए बैठे है शंकर, सज धज के दरबार, कावड़िया ले आओ कावड़, राह तके सरकार ॥ कावड़िया ले चल गंग की धार, जहाँ बिराजे भोले दानी, करके अनोखा श्रृंगार, कावड़ियां ले चल गंग की धार ॥ अंग...
श्री गंगा मैया आरती हिन्दी में नमामि गंगे ! तव पाद पंकजम्, सुरासुरैः वंदित दिव्य रूपम् । भक्तिम् मुक्तिं च ददासि नित्यं, भावानुसारेण सदा नराणाम् ॥ हर हर गंगे, जय माँ गंगे, हर हर गंगे, जय माँ गंगे ॥ ॐ जय...
आपका स्वागत है ‘सनातन ज्ञान मंथन’ वेबसाइट पर! यहां, हम आपको प्राचीन भारतीय साहित्य के मूल्यवान गहनों से परिचित कराएंगे। हमारी धरोहर में सीता-राम, कृष्ण-बालराम, और अर्जुन-कर्ण की अद्भुत कहानियों से लेकर महाभारत और रामायण के अनकहे पहलू तक कई रहस्यमयी कथाएं और ज्ञान छिपा है।