श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम् हिन्दी में निशुम्भ शुम्भ गर्जनी, प्रचण्ड मुण्ड खण्डिनी । बनेरणे प्रकाशिनी, भजामि विन्ध्यवासिनी ॥ त्रिशूल मुण्ड धारिणी, धरा विघात हारिणी । गृहे-गृहे निवासिनी, भजामि ...
श्री विन्ध्येश्वरी जी की आरती हिन्दी में सुन मेरी देवी पर्वतवासनी । कोई तेरा पार ना पाया माँ ॥ पान सुपारी ध्वजा नारियल । ले तेरी भेंट चढ़ायो माँ ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासनी । कोई तेरा पार ना पाया माँ ॥...





