No Comments
श्री विन्ध्येश्वरी जी की आरती हिन्दी में सुन मेरी देवी पर्वतवासनी । कोई तेरा पार ना पाया माँ ॥ पान सुपारी ध्वजा नारियल । ले तेरी भेंट चढ़ायो माँ ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासनी । कोई तेरा पार ना पाया माँ...
श्री विन्ध्येश्वरी जी की आरती हिन्दी में सुन मेरी देवी पर्वतवासनी । कोई तेरा पार ना पाया माँ ॥ पान सुपारी ध्वजा नारियल । ले तेरी भेंट चढ़ायो माँ ॥ सुन मेरी देवी पर्वतवासनी । कोई तेरा पार ना पाया माँ...
आपका स्वागत है ‘सनातन ज्ञान मंथन’ वेबसाइट पर! यहां, हम आपको प्राचीन भारतीय साहित्य के मूल्यवान गहनों से परिचित कराएंगे। हमारी धरोहर में सीता-राम, कृष्ण-बालराम, और अर्जुन-कर्ण की अद्भुत कहानियों से लेकर महाभारत और रामायण के अनकहे पहलू तक कई रहस्यमयी कथाएं और ज्ञान छिपा है।