
श्री शनिदेव आरती – ॐ जय जय शनि महाराज हिन्दी में ॐ जय जय शनि महाराज, स्वामी जय जय शनि महाराज । कृपा करो हम दीन रंक पर, दुःख हरियो प्रभु आज ॥ ॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥ सूरज के तुम बालक होकर, जग में...

श्री शनिदेव आरती – ॐ जय जय शनि महाराज हिन्दी में ॐ जय जय शनि महाराज, स्वामी जय जय शनि महाराज । कृपा करो हम दीन रंक पर, दुःख हरियो प्रभु आज ॥ ॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥ सूरज के तुम बालक होकर, जग में...

श्री भैरव जी की आरती हिन्दी में जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा । जय काली और गौर देवी कृत सेवा ॥ ॥ जय भैरव देवा…॥ तुम्ही पाप उद्धारक दुःख सिन्धु तारक । भक्तो के सुख कारक भीषण वपु धारक ॥ ॥ जय भैरव देवा…॥...

श्री शिव जी की आरती – ॐ जय गंगाधर हिन्दी में ॐ जय गंगाधर जय हर, जय गिरिजाधीशा । त्वं मां पालय नित्यं, कृपया जगदीशा ॥ ॐ हर हर हर महादेव ॥ कैलासे गिरिशिखरे, कल्पद्रुमविपिने । गुंजति मधुकरपुंजे, कुंजवने गहने ॥ ॐ हर हर हर महादेव ॥ कोकिलकूजित...

गोपाल गोकुल वल्लभे, प्रिय गोप गोसुत भजन हिन्दी में गोपाल गोकुल वल्लभे, प्रिय गोप गोसुत वल्लभं । चरणारविन्दमहं भजे, भजनीय सुरमुनि दुर्लभं ॥ घनश्याम काम अनेक छवि, लोकाभिराम मनोहरं । किंजल्क वसन किशोर मूरति, भूरिगुण करुणाकरं ॥ सिरकेकी पच्छ विलोलकुण्डल, अरुण वनरुहु लोचनं । कुजव...

श्री काशी विश्वनाथ अष्टकम: मंत्र हिन्दी में ॥ श्रीकाशीविश्वनाथाष्टकम् ॥ गङ्गातरंगरमणीयजटाकलापं गौरीनिरन्तरविभूषितवामभागम् । नारायणप्रियमनंगमदापहारं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम् ॥1॥ वाचामगोचरमनेकगुणस्वरूपं वागीशविष्णुसुरसेवितपादपीठम् । वामेनविग्रहवरेणकलत्रवन्तं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम् ॥2॥ भूताधिपं भुजगभूषणभूषितांगं व्याघ्राजिनांबरधरं जटिलं त्रिनेत्रम् । पाशांकुशाभयवरप्रदशूलपाणिं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम् ॥3॥ शीतांशुशोभितकिरीटविराजमानं भालेक्षणानलविशोषितपंचबाणम् । नागाधिपारचितभासुरकर्णपूरं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम् ॥4॥ पंचाननं...

कैला माता आरती(ओम जय कैला रानी) हिन्दी में ॐ जय कैला रानी, मैया जय कैला रानी । ज्योति अखंड दिये माँ तुम सब जगजानी ॥ तुम हो शक्ति भवानी मन वांछित फल दाता ॥ मैया मन वांछित फल दाता ॥ अद्भुत रूप अलौकिक सदानन्द माता ॥...

श्री जगन्नाथ आरती – चतुर्भुज जगन्नाथ हिन्दी में चतुर्भुज जगन्नाथ कंठ शोभित कौसतुभः ॥ पद्मनाभ, बेडगरवहस्य, चन्द्र सूरज्या बिलोचनः जगन्नाथ, लोकानाथ, निलाद्रिह सो पारो हरि दीनबंधु, दयासिंधु, कृपालुं च रक्षकः कम्बु पानि, चक्र पानि, पद्मनाभो, नरोतमः जग्दम्पा रथो व्यापी, सर्वव्यापी सुरेश्वराहा लोका राजो, देव राजः, चक्र...

सबसे पहले गजानन मनाया तुम्हें भजन हिन्दी में ॥ सबसे पहले गजानन मनाया तुम्हे ॥ श्लोक – वक्रतुण्ड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा ॥ सबसे पहले गजानन मनाया तुम्हे, तेरा सुमिरण करे आज आ जाइये, सबसे पहले गजानन मनाया तुम्हें, तेरा सुमिरण...

करो कृपा कुछ ऐसी, तेरे दर आता रहूँ – भजन हिन्दी में करो कृपा कुछ ऐसी, तेरे दर आता रहूँ, तुम रूठो मुझसे भले चाहे, पर मैं मनाता रहूं, करों कृपा कुछ ऐसी, तेरे दर आता रहूँ ॥ जहान में कौन, मेरे दुःख को समझ...

हम लाड़ले खाटू वाले के हमें बाबा लाड़ लड़ाता है भजन हिन्दी में हम लाड़ले खाटू वाले के, हमें बाबा लाड़ लड़ाता है, होते है हम मायूस कभी, ये मोरछड़ी लहराता है, हम लाड़ले खाटु वाले के, हमें बाबा लाड़ लड़ाता है ॥ ये मात...
आपका स्वागत है ‘सनातन ज्ञान मंथन’ वेबसाइट पर! यहां, हम आपको प्राचीन भारतीय साहित्य के मूल्यवान गहनों से परिचित कराएंगे। हमारी धरोहर में सीता-राम, कृष्ण-बालराम, और अर्जुन-कर्ण की अद्भुत कहानियों से लेकर महाभारत और रामायण के अनकहे पहलू तक कई रहस्यमयी कथाएं और ज्ञान छिपा है।