जो व्यक्ति अष्टमी, नवमी तथा चतुर्दशी तिथि को इस स्तोत्र का पाठ करता है वह अपनी मोक्ष, धन, विद्या तथा तर्क ज्ञान जैसी कामनाओं को प्राप्त कर लेता है। जब व्यक्ति विपत्ति, संग्राम, मूर्खत्व की दशा, दान के समय तथा...
जो व्यक्ति अष्टमी, नवमी तथा चतुर्दशी तिथि को इस स्तोत्र का पाठ करता है वह अपनी मोक्ष, धन, विद्या तथा तर्क ज्ञान जैसी कामनाओं को प्राप्त कर लेता है। जब व्यक्ति विपत्ति, संग्राम, मूर्खत्व की दशा, दान के समय तथा...
हरिः ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् । चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ॥१॥ तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् । यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम् ॥२॥ अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रबोधिनीम् । श्रियं देवीमुपह्वये श्रीर्मा देवी जुषताम् ॥३॥ कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां...
गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस, उत्तर भारत में अधिक प्रसिद्ध है। गोस्वामी तुलसीदासजी कृत संपूर्ण रामायण का पाठ करने में कुछ दिन का समय लग सकता है। और कई बार समय की कमी के कारण एक ही बैठक में...
अथ ध्यानम् – दिगंबरं भस्मसुगंध लेपनं चक्रं त्रिशूलं डमरुं गदां च । पद्मासनस्थं रविसोमनेत्र्म दत्तात्रयं नमभीष्टसिद्धिदम् ॥ १ ॥ काषायवस्त्रं करदंडधारिणं कमंडलुं पद्मकरेण शंखम् । चक्रं गदाभूषितभूषणाढ्यं श्रीपादराजं शरणं प्रपद्ये ॥ २ ॥ कृते जनार्दनो देवस्त्रेतायां रघुनन्दनः । द्वापरे रामकृष्णौ...
ॐ भूर्भुव: स्व: । तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो न: प्रचोदयात् ॥ यजुर्वेद 36.3 तूने हमें उत्पन्न किया, पालन कर रहा है तू । तुझ से ही पाते प्राण हम, दुखियों के कष्ट हरता तू ॥ तेरा महान तेज...
अथ बिल्वाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ॥ त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम् । त्रिजन्म पापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ १॥ त्रिशाखैः बिल्वपत्रैश्च अच्छिद्रैः कोमलैः शुभैः । तव पूजां करिष्यामि एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ २॥ सर्वत्रैलोक्यकर्तारं सर्वत्रैलोक्यपालनम् । सर्वत्रैलोक्यहर्तारं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ ३॥ नागाधिराजवलयं नागहारेण भूषितम् ।...
॥ श्रीकाशीविश्वनाथाष्टकम् ॥ गङ्गातरंगरमणीयजटाकलापं गौरीनिरन्तरविभूषितवामभागम् । नारायणप्रियमनंगमदापहारं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम् ॥1॥ वाचामगोचरमनेकगुणस्वरूपं वागीशविष्णुसुरसेवितपादपीठम् । वामेनविग्रहवरेणकलत्रवन्तं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम् ॥2॥ भूताधिपं भुजगभूषणभूषितांगं व्याघ्राजिनांबरधरं जटिलं त्रिनेत्रम् । पाशांकुशाभयवरप्रदशूलपाणिं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम् ॥3॥ शीतांशुशोभितकिरीटविराजमानं भालेक्षणानलविशोषितपंचबाणम् । नागाधिपारचितभासुरकर्णपूरं वाराणसीपुरपतिं भज विश्वनाथम् ॥4॥ पंचाननं दुरितमत्तमतङ्गजानां...
उमाकांताय कांताय कामितार्थ प्रदायिने श्रीगिरीशाय देवाय मल्लिनाथाय मंगलम् ॥ सर्वमंगल रूपाय श्री नगेंद्र निवासिने गंगाधराय नाथाय श्रीगिरीशाय मंगलम् ॥ सत्यानंद स्वरूपाय नित्यानंद विधायने स्तुत्याय श्रुतिगम्याय श्रीगिरीशाय मंगलम् ॥ मुक्तिप्रदाय मुख्याय भक्तानुग्रहकारिणे सुंदरेशाय सौम्याय श्रीगिरीशाय मंगलम् ॥ श्रीशैले शिखरेश्वरं गणपतिं श्री...
॥ धनदालक्ष्मी स्तोत्रम् ॥ ॥ धनदा उवाच ॥ देवी देवमुपागम्य नीलकण्ठं मम प्रियम्। कृपया पार्वती प्राह शंकरं करुणाकरम्॥1॥ ॥ देव्युवाच ॥ ब्रूहि वल्लभ साधूनां दरिद्राणां कुटुम्बिनाम्। दरिद्र दलनोपायमंजसैव धनप्रदम्॥2॥ ॥ शिव उवाच ॥ पूजयन् पार्वतीवाक्यमिदमाह महेश्वरः। उचितं जगदम्बासि तव भूतानुकम्पया॥3॥...
सत सृष्टि तांडव रचयिता नटराज राज नमो नमः । हे आद्य गुरु शंकर पिता नटराज राज नमो नमः ॥ गंभीर नाद मृदंगना धबके उरे ब्रह्माडना । नित होत नाद प्रचंडना नटराज राज नमो नमः ॥ शिर ज्ञान गंगा चंद्रमा चिद्ब्रह्म...
आपका स्वागत है ‘सनातन ज्ञान मंथन’ वेबसाइट पर! यहां, हम आपको प्राचीन भारतीय साहित्य के मूल्यवान गहनों से परिचित कराएंगे। हमारी धरोहर में सीता-राम, कृष्ण-बालराम, और अर्जुन-कर्ण की अद्भुत कहानियों से लेकर महाभारत और रामायण के अनकहे पहलू तक कई रहस्यमयी कथाएं और ज्ञान छिपा है।