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मंत्र संग्रह

Sanatan Gyaan Manthan के इस 'मन्त्र संग्रह' (Mantra Sangrah) सेक्शन में आपका स्वागत है। सनातन धर्म में मन्त्रों का विशेष महत्व है। मन्त्र केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि ये वे ब्रह्मांडीय ध्वनियाँ हैं जो हमारे मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करने की शक्ति रखती हैं। प्राचीन ऋषियों और मुनियों ने हमें ऐसे दिव्य मन्त्र दिए हैं जिनका सही उच्चारण और जाप करने से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं दूर हो सकती हैं। हमारे इस संग्रह में आपको सभी देवी-देवताओं के शक्तिशाली मन्त्र (Powerful Hindu Mantras) विस्तार से मिलेंगे। यहाँ हमने न केवल मन्त्रों के लिरिक्स (Mantra Lyrics) दिए हैं, बल्कि उनके गहरे अर्थ और जाप करने की सही विधि (Mantra Jaap Vidhi) भी साझा की है। चाहे आप मानसिक शांति के लिए गायत्री मन्त्र (Gayatri Mantra) ढूंढ रहे हों, रोगों से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय मन्त्र (Mahamrityunjay Mantra), या फिर सुख-समृद्धि के लिए लक्ष्मी मन्त्र; यहाँ आपको सब कुछ एक ही जगह पर मिलेगा। मन्त्र जाप के लाभ (Benefits of Mantra Chanting): शास्त्रों के अनुसार, मन्त्रों का जाप करने से एकाग्रता बढ़ती है, नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास होता है। हमारे 'Mantra Sangrah' में आपको वैदिक मन्त्रों से लेकर बीज मन्त्रों तक की पूरी जानकारी मिलेगी, जो आपकी दैनिक पूजा-पाठ को और भी प्रभावशाली बनाएगी। शुद्ध उच्चारण और सही विधि-विधान के साथ मन्त्रों की शक्ति को अपने जीवन में उतारने के लिए इस पेज को नियमित रूप से पढ़ें। हम यहाँ समय-समय पर नए मन्त्र और उनके रहस्यों को जोड़ते रहते हैं ताकि आपको Shuddh Sanatan Gyaan प्राप्त होता रहे।

ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मामृतं गमय ॥ ॐ शान्ति शान्ति शान्तिः ॥ – बृहदारण्यकोपनिषद् 1.3.28 हिन्दी भावार्थ: हे प्रभु! मुझे असत्य से सत्य की ओर । मुझे अन्धकार से प्रकाश की ओर...

हंसरै में शिर पातु कूष्माण्डे भवनाशिनीम् । हसलकरीं नेत्रेच, हसरौश्च ललाटकम् ॥ कौमारी पातु सर्वगात्रे, वाराही उत्तरे तथा, पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम । दिगिव्दिक्षु सर्वत्रेव कूं बीजं सर्व...

श्री बाबोसा भगवान के 108 नाम ॐ ओंकाराय नमः । ॐ बाबोसा देवाय नमः । ॐ पन्नाय नमः । ॐ छगनी सुताय नमः । ॐ चूरू निवासाय नमः । ॐ गदाधराय नमः । ॐ कृपाकराय नमः । ॐ ब्र्हमाचारिण नमः । ॐ कुमाराय नमः । ॐ घेवरचंद...

नम ॐ विष्णु-पादाय कृष्ण-प्रेष्ठाय भूतले श्रीमते भक्तिवेदांत-स्वामिन् इति नामिने ।नमस्ते सारस्वते देवे गौर-वाणी-प्रचारिणे निर्विशेष-शून्यवादि-पाश्चात्य-देश-तारिणे ॥ Srila Prabhupada Pranati Nama Om Vis...

येषां न विद्या न तपो न दानं, ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः । ते मर्त्यलोके भुविभारभूता, मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति ॥ [चाणक्य नीति / 10 / 7] हिन्दी भावार्थ: जिन लोगों के पास न तो विद्या है, न तप, न दान, न...

अलसस्य कुतः विद्या, अविद्यस्य कुतः धनम्। अधनस्य कुतः मित्रम्अ, मित्रस्य कुतः सुखम् ॥ हिन्दी भावार्थ: आलसी इन्सान को विद्या कहाँ। विद्याविहीन/अनपढ़/मूर्ख को धन कहाँ। धनविहीन/निर्धन को मित्र कहाँ। और मित...

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