ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मामृतं गमय ॥ ॐ शान्ति शान्ति शान्तिः ॥ – बृहदारण्यकोपनिषद् 1.3.28 हिन्दी भावार्थ: हे प्रभु! मुझे असत्य से सत्य की ओर । मुझे अन्धकार से प्रकाश की ओर । और मुझे मृत्यु से...
ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मामृतं गमय ॥ ॐ शान्ति शान्ति शान्तिः ॥ – बृहदारण्यकोपनिषद् 1.3.28 हिन्दी भावार्थ: हे प्रभु! मुझे असत्य से सत्य की ओर । मुझे अन्धकार से प्रकाश की ओर । और मुझे मृत्यु से...
हंसरै में शिर पातु कूष्माण्डे भवनाशिनीम् । हसलकरीं नेत्रेच, हसरौश्च ललाटकम् ॥ कौमारी पातु सर्वगात्रे, वाराही उत्तरे तथा, पूर्वे पातु वैष्णवी इन्द्राणी दक्षिणे मम । दिगिव्दिक्षु सर्वत्रेव कूं बीजं सर्वदावतु ॥
श्री बाबोसा भगवान के 108 नाम ॐ ओंकाराय नमः । ॐ बाबोसा देवाय नमः । ॐ पन्नाय नमः । ॐ छगनी सुताय नमः । ॐ चूरू निवासाय नमः । ॐ गदाधराय नमः । ॐ कृपाकराय नमः । ॐ ब्र्हमाचारिण नमः...
नम ॐ विष्णु-पादाय कृष्ण-प्रेष्ठाय भूतले श्रीमते भक्तिवेदांत-स्वामिन् इति नामिने ।नमस्ते सारस्वते देवे गौर-वाणी-प्रचारिणे निर्विशेष-शून्यवादि-पाश्चात्य-देश-तारिणे ॥ Srila Prabhupada Pranati Nama Om Vishnu-padaya Krishna-preshthaya Bhu-tale, Srimate Bhaktivedanta-svamin Iti Namine. Namas Te Sarasvate Deve Gaura-vani-pracarine, Nirvisesha-sunyavadi-pascatya-desa-tarine.
येषां न विद्या न तपो न दानं, ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः । ते मर्त्यलोके भुविभारभूता, मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति ॥ [चाणक्य नीति / 10 / 7] हिन्दी भावार्थ: जिन लोगों के पास न तो विद्या है, न तप, न दान,...
अलसस्य कुतः विद्या, अविद्यस्य कुतः धनम्। अधनस्य कुतः मित्रम्अ, मित्रस्य कुतः सुखम् ॥ हिन्दी भावार्थ: आलसी इन्सान को विद्या कहाँ। विद्याविहीन/अनपढ़/मूर्ख को धन कहाँ। धनविहीन/निर्धन को मित्र कहाँ। और मित्रविहीन/अमित्र को सुख कहाँ। Alasasya Kutah Vidya Alasasya Kutah Vidya, Avidyasya...
आपका स्वागत है ‘सनातन ज्ञान मंथन’ वेबसाइट पर! यहां, हम आपको प्राचीन भारतीय साहित्य के मूल्यवान गहनों से परिचित कराएंगे। हमारी धरोहर में सीता-राम, कृष्ण-बालराम, और अर्जुन-कर्ण की अद्भुत कहानियों से लेकर महाभारत और रामायण के अनकहे पहलू तक कई रहस्यमयी कथाएं और ज्ञान छिपा है।