श्री कृष्ण चैतन्य नाम धुन संकीर्तन, इस्कान द्वारा मनन करने वाली प्रसिद्ध धुन। (जय) श्रीकृष्णचैतन्य प्रभु नित्यानंद । श्री अद्वैत गदाधर श्रीवासादि गौर भक्तवृंद ॥ Panch Tattva Pranam Mantra in English J...

अथ ध्यानम कस्तूरीतिलकं ललाटपटले वक्ष:स्थले कौस्तुभं नासाग्रे वरमौत्तिकं करतले वेणुं करे कंकणम । सर्वाड़्गे हरिचन्दनं सुललितं कण्ठे च मुक्तावलि – र्गोपस्रीपरिवेष्टितो विजयते गोपालचूडामणि: ॥1॥ फुल्लेन्द...

भावयामि गोपालबालं मन- स्सेवितं तत्पदं चिन्तयेहं सदा ॥ भावयामि गोपालबालं मन- स्सेवितं तत्पदं चिन्तयेहं सदा ॥ कटि घटित मेखला खचितमणि घण्टिका- पटल निनदेन विभ्राजमानम् । कुटिल पद घटित सङ्कुल शिञ्जितेनतं च...

॥ श्रीशनैश्चरसहस्रनामावळिः ॥ ॐ अमिताभाषिणे नमः । ॐ अघहराय नमः । ॐ अशेषदुरितापहाय नमः । ॐ अघोररूपाय नमः । ॐ अतिदीर्घकायाय नमः । ॐ अशेषभयानकाय नमः । ॐ अनन्ताय नमः । ॐ अन्नदात्रे नमः । ॐ अश्वत्थमूलजपप्रि...

॥ अथ श्री कृष्णाष्टकम् ॥ वसुदेव सुतं देवंकंस चाणूर मर्दनम् । देवकी परमानन्दंकृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥१॥ अतसी पुष्प सङ्काशम्हार नूपुर शोभितम् । रत्न कङ्कण केयूरंकृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥२॥ कुटिलालक संय...

जय शङ्खगदाधर नीलकलेवर पीतपटाम्बर देहि पदम् । जय चन्दनचर्चित कुण्डलमण्डित कौस्तुभशोभित देहि पदम् ॥१॥ जय पङ्कजलोचन मारविमोहन पापविखण्डन देहि पदम् । जय वेणुनिनादक रासविहारक वङ्किम सुन्दर देहि पदम् ॥२॥ जय...

॥ विनियोग मन्त्र ॥ ॐ अस्य श्रीबृहस्पति स्तोत्रस्य गृत्समद् ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, बृहस्पतिर्देवता, बृहस्पति प्रीत्यर्थे जपे विनियोग: गुरुर्बृहस्पतिर्जीव: सुराचार्यो विदां वरः । वागीशो धिषणो दीर्घश्मश्र...

आदि गुरु शंकराचार्य अपनी माँ की मृत्यु के समय अपनी माँ के पास पहुँचे तथा उन्होंने अपनी माँ का अंतिम संस्कार भी किया। जबकि शंकराचार्य होते हुए उनका अग्नि को हाथ लगाना वर्जित था। तब गुरु शंकराचार्य ने म...

सीता कल्याण वैभोगमे राम कल्याण वैभोगमे पवनज स्तुति पात्र पावन चरित्र रवि सोम वर नेत्र रमणीय गात्र भक्त जन परिपाल भरित शर जाल भुक्ति मुक्तिद लील भू-देव पाल पाम(रा)सुर भीम परिपूर्ण काम श्याम जग(द)भिराम ...

जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम् जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम् ॥१॥ दारिद्र्यरणसंहर्त्रीं भक्तानाभिष्टदायिनीम् । विदेहराजतनयां राघवानन्दकारिणीम् ॥२॥ भूमेर्दुहितरं विद्यां नमामि प्रकृति...