महाभारत का युद्ध समाप्ति की ओर बढ़ रहा था। कुरुक्षेत्र की धरती पर चारों ओर युद्ध की विभीषिका दिखाई दे रही थी। अनगिनत योद्धा वीरगति को प्राप्त हो चुके थे और अब युद्ध अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर पहुँच चु...

श्रीराम और माता सीता के दर्शन

रामायण की कथाएं जितनी बार सुनी जाएं, उतनी ही बार मन को अपने भीतर खींच लेती हैं। इन कथाओं में केवल युद्ध, विजय और पराक्रम ही नहीं है, बल्कि ऐसी भक्ति भी है, जिसके सामने संसार की सबसे अनमोल वस्तुएं भी छ...

दक्षिण भारत की धरती पर ऐसे कई प्राचीन मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी मान्यताएँ और रहस्यमयी कथाएँ आज भी लोगों को हैरान करती हैं। लेकिन कर्नाटक के हासन जिले में स्थित हसन अंबा देवी मंदिर इन सबसे अलग माना जाता ह...

रावण की मृत्यु का वह रहस्य

लंका की धरती पर युद्ध अपने अंतिम चरण में पहुँच चुका था। एक ओर भगवान श्रीराम की सेना थी और दूसरी ओर लंका का महान राजा रावण अपनी पूरी शक्ति के साथ युद्धभूमि में खड़ा था। चारों तरफ युद्ध का शोर था। आकाश ...

सरस्वती स्तोत्रम सरस्वती माता के स्तोत्रमों में से एक है। इस स्तोत्रम का पाठ देवी सरस्वती से सम्बन्धित विभिन्न अवसरों पर किया जाता है। ॥ श्री सरस्वती स्तोत्रम् ॥ या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त...

॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ नमः शिवाभ्यां नवयौवनाभ्यां परस्पराश्लिष्टवपुर्धराभ्याम् । नगेन्द्रकन्यावृषकेतनाभ्यां नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥ 1 ॥ नमः शिवाभ्यां सरसोत्सवाभ्यां नमस्कृताभीष्टवरप्रदाभ्याम् । नाराय...

कीलकम् का पाठ देवी कवचम् और अर्गला स्तोत्रम् के बाद किया जाता है। और इसके बाद वेदोक्तम् रात्रि सूक्तम् का पाठ किया जाता है। कीलकम् एक महत्वपूर्ण स्तोत्रम् है जो चण्डी पाठ से पहले सुनाया जाता है। ॥ अथ ...

॥ अथार्गलास्तोत्रम् ॥ ॐ अस्य श्रीअर्गलास्तोत्रमन्त्रस्य विष्णुर्ऋषिः,अनुष्टुप् छन्दः, श्रीमहालक्ष्मीर्देवता, श्रीजगदम्बाप्रीतयेसप्तशतीपाठाङ्गत्वेन जपे विनियोगः॥ ॐ नमश्चण्डिकायै॥ मार्कण्डेय उवाच ॐ जयन्...

॥ श्री गणपति स्तोत्रम् ॥ जेतुं यस्त्रिपुरं हरेणहरिणा व्याजाद्बलिं बध्नता स्रष्टुं वारिभवोद्भवेनभुवनं शेषेण धर्तुं धराम्। पार्वत्या महिषासुरप्रमथनेसिद्धाधिपैः सिद्धये ध्यातः पञ्चशरेण विश्वजितयेपायात्स ...

श्री नन्दकुमाराष्टकम् एक भक्ति गीत है जो भगवान कृष्णा पर आधारित है। ॥ श्रीनन्दकुमाराष्टकम् ॥ सुन्दरगोपालम् उरवनमालंनयनविशालं दुःखहरं। वृन्दावनचन्द्रमानन्दकन्दंपरमानन्दं धरणिधर वल्लभघनश्यामं पूर्णकामंअ...

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