Pradosh Vrat

बुध प्रदोष व्रत कथा हिंदी में वार के अनुसार जो प्रदोष व्रत करते हैं, उसी के अनुरूप उसका फल प्राप्त होता है। प्रदोष अथवा त्रयोदशी का व्रत मनुष्य को संतोषी एवं सुखी बनाता है। बुध त्रयोदशी प्रदोष व्रत कर...

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वामन अवतार की पौराणिक कथा एक बार भक्त शिरोमणि प्रह्लाद के पौत्र दैत्यराज बलि ने इंद्र को परास्त कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। पराजित इंद्र की दयनीय स्थिति को देखकर उनकी मां अदिति बहुत दुखी हुईं। उन्हों...

sita-ji-ki-aarti

श्री सीता माता आरती हिन्दी में आरती श्री जनक दुलारी की । सीता जी रघुवर प्यारी की ॥ जगत जननी जग की विस्तारिणी, नित्य सत्य साकेत विहारिणी, परम दयामयी दिनोधारिणी, सीता मैया भक्तन हितकारी की ॥ आरती श्री ज...

Shri balaji arti

श्री बालाजी आरती हिन्दी में ॐ जय हनुमत वीरा, स्वामी जय हनुमत वीरा । संकट मोचन स्वामी, तुम हो रनधीरा ॥ ॥ ॐ जय हनुमत वीरा..॥ पवन पुत्र अंजनी सूत, महिमा अति भारी । दुःख दरिद्र मिटाओ, संकट सब हारी ॥ ॥ ॐ ज...

Chandra dev

श्री चन्द्र देव जी की आरती हिन्दी में ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा । दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी । रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी । दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी । जो कोई आरती तेरी, ...

अरज सुणो बनवारी भजन

अरज सुणो बनवारी भजन हिन्दी में   अरज सुणो बनवारी सांवरियां म्हारी, अरज सुणो बनवारी, अरज सुनो गिरधारी सांवरिया म्हारी, अरज सुनो गिरधारी ॥ श्वास श्वास मे थारे सुमीरु दाता, भूलों मति बनवारी, भुल गया...

Gajanan Gauri Ke Lala

गजानंद गौरी जी के लाला, मेरी महफिल में भजन हिन्दी में गजानंद गौरी जी के लाला, मेरी महफिल में आ जाना, मनाएं आज हम तुमको, मेरी महफिल में आ जाना ॥ गजानंद शिव के प्यारे हो, गौरा के दुलारे हो, धरु मे ध्यान...

shri krishna govind

यशोदा जायो ललना मैं वेदन में सुन आई भजन हिन्दी में   यशोदा जायो ललना, मैं वेदन में सुन आई, मैं वेदन में सुन आई, पुराणन में सुन आई, यशोदा जायों ललना, मैं वेदन में सुन आई ॥ मथुरा या ने जन्म लियो है...

Shri krishna

कई जन्मों से बुला रही हूँ भजन हिन्दी में   कई जन्मों से बुला रही हूँ, कोई तो रिश्ता जरूर होगा, नजरों से नजरें मिला भी ना पाए, मेरी नजर का कुसूर होगा । कई जन्मो से बुला रही हूँ, कोई तो रिश्ता जरूर...

श्री बद्रीनाथ जी

श्री बद्रीनाथ जी की आरती हिन्दी में पवन मंद सुगंध शीतल, हेम मंदिर शोभितम् । निकट गंगा बहत निर्मल, श्री बद्रीनाथ विश्व्म्भरम् ॥ शेष सुमिरन करत निशदिन, धरत ध्यान महेश्वरम् । वेद ब्रह्मा करत स्तुति, श्री...

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