shri krishna

अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो भजन हिन्दी में   देखो देखो यह गरीबी, यह गरीबी का हाल, कृष्ण के दर पे यह विशवास ले के आया हूँ। मेरे बचपन का दोस्त हैं मेरा श्याम, येही सोच कर मैं आस ले कर के आया हू...

shri krishna

कभी राम बनके, कभी श्याम बनके भजन हिन्दी में   कभी राम बनके कभी श्याम बनके, चले आना प्रभुजी चले आना ॥ तुम राम रूप में आना, तुम राम रूप में आना सीता साथ लेके, धनुष हाथ लेके, चले आना प्रभुजी चले आना...

नृसिंह भगवान आरती

नृसिंह भगवान आरती हिन्दी में ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे । स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे, स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे, जनका ताप हरे ॥ ॐ जय नरसिंह हरे ॥ तुम हो दिन दयाला, भक्तन हितकारी, प्रभु भक्तन हितक...

shri krishna bhajan

आज है आनंद बाबा नन्द के भवन में भजन हिन्दी में   आज है आनंद बाबा नन्द के भवन में, ऐसा ना आनंद छाया कभी त्रिभुवन में, ऐसा ना आनंद छाया कभी त्रिभुवन में, आज है आनंद बाबा नन्द के भवन में ॥ जान गए सब...

Shiva Stuti

श्री शिव स्वर्णमाला स्तुति हिन्दी में   साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥ ईशगिरीश नरेश परेश महेश बिलेशय भूषण भो। साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्॥ उमया दिव्य सुमङ्गल विग्र...

shri krishna

कृष्ण कन्हैया आज तुम्हारे, हाथ में राखी भजन हिन्दी में कृष्ण कन्हैया आज तुम्हारे, हाथ में राखी बांधूंगी, प्रेम भाव के सिवा कन्हैया, तुमसे कुछ नहीं मांगूगी, तुमसे कुछ नहीं मांगूगी ॥ इस राखी के तार तार ...

Maa parwati

माँ पार्वती चालीसा हिन्दी में ॥ दोहा ॥ जय गिरी तनये दक्षजे शम्भू प्रिये गुणखानि । गणपति जननी पार्वती अम्बे! शक्ति! भवानि ॥ ॥ चौपाई ॥ ब्रह्मा भेद न तुम्हरो पावे । पंच बदन नित तुमको ध्यावे ॥ षड्मुख कहि ...

Jai Radha Vallabh Shri Hari Vansh

मैं राधा वल्लभ की, राधा वल्लभ मेरे भजन हिन्दी में मैं राधा वल्लभ की, राधा वल्लभ मेरे मैं राधा वल्लभ की, राधा वल्लभ मेरे मैं राधा वल्लभ की, राधा वल्लभ मेरे तुम सदा सदा से मेरे, राधा वल्लभ मेरे तुम सदा ...

राधा आरती

आरती श्री वृषभानुसुता – राधा आरती हिन्दी में आरती श्री वृषभानुसुता की, मंजुल मूर्ति मोहन ममता की ॥ त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि, विमल विवेकविराग विकासिनि । पावन प्रभु पद प्रीति प्रकाशिनि, सुन्दर...

Radhe Krishna Ki Jyoti

राधे कृष्ण की ज्योति अलोकिक भजन हिन्दी में   राधे कृष्ण की ज्योति अलोकिक, तीनों लोक में छाये रही है । भक्ति विवश एक प्रेम पुजारिन, फिर भी दीप जलाये रही है । कृष्ण को गोकुल से राधे को… कृष्ण...

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