श्री शिव आरती

लिङ्गाष्टकम् हिन्दी में   ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम् । जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥१॥ देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम् । रावणदर्पविनाश...

shri krishna

कृपालु बड़े हैं श्री श्याम सुन्दर भजन हिन्दी में   कृपालु बड़े हैं श्री श्याम सुन्दर, कृपालु कृपा की बरसात कर दे, इनके हृदय में प्रेम भरा है, भगवन सबों से प्रेम है करते, कृपालु बड़े है श्रीं श्याम स...

कृष्ण कन्हैया

जेल में प्रकटे कृष्ण कन्हैया भजन हिन्दी में   जेल में प्रकटे कृष्ण कन्हैया, सबको बहुत बधाई है, बहुत बधाई है, सबको बहुत बधाई है, जेल में प्रकटे कृष्ण कन्हैंया, सबको बहुत बधाई है ॥ मात-पिता को सब स...

shri krishna

लल्ला की सुन के मै आयी यशोदा भजन हिन्दी में लल्ला की सुन के मै आयी, यशोदा मैया देदो बधाई, कान्हा की सुनके मै आयी, यशोदा मैया देदो बधाई, लाला जनम सुन आयी, यशोदा मैया देदो बधाई । देदो बधाई मैया देदो बधा...

श्री गायत्री चालीसा

श्री गायत्री चालीसा हिन्दी में ॥ दोहा ॥ हीं श्रीं, क्लीं, मेधा, प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड । शांति, क्रांति, जागृति, प्रगति, रचना शक्ति अखण्ड ॥ जगत जननि, मंगल करनि, गायत्री सुखधाम । प्रणवों सावित्री, ...

अन्नपूर्णा माता

माँ अन्नपूर्णा चालीसा हिन्दी में ॥ दोहा ॥ विश्वेश्वर पदपदम की रज निज शीश लगाय । अन्नपूर्णे, तव सुयश बरनौं कवि मतिलाय । ॥ चौपाई ॥ नित्य आनंद करिणी माता, वर अरु अभय भाव प्रख्याता ॥ जय ! सौंदर्य सिंधु जग...

shri vishwakarma chalisa

श्री विश्वकर्मा चालीसा हिन्दी में ॥ दोहा ॥ श्री विश्वकर्म प्रभु वन्दऊं, चरणकमल धरिध्यान । श्री, शुभ, बल अरु शिल्पगुण, दीजै दया निधान ॥ ॥ चौपाई ॥ जय श्री विश्वकर्म भगवाना । जय विश्वेश्वर कृपा निधाना ॥ ...

श्री गुरु अष्टकम

श्री गुरु अष्टकम हिन्दी में   शरीरं सुरुपं तथा वा कलत्रं यशश्चारू चित्रं धनं मेरुतुल्यम् । मनश्चेन्न लग्नं गुरोरंघ्रिपद्मे ततः किं ततः किं ततः किं ततः किम् ॥ 1 ॥ कलत्रं धनं पुत्रपौत्रादि सर्वं गृ...

lalita mata

श्री ललिता माता की आरती हिन्दी में श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी । राजेश्वरी जय नमो नमः ॥ करुणामयी सकल अघ हारिणी । अमृत वर्षिणी नमो नमः ॥ जय शरणं वरणं नमो नमः । श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी ॥ अशु...

श्री गोरक्ष

बाबा गोरखनाथ आरती हिन्दी में जय गोरख देवा, जय गोरख देवा । कर कृपा मम ऊपर, नित्य करूँ सेवा ॥ शीश जटा अति सुंदर, भाल चन्द्र सोहे । कानन कुंडल झलकत, निरखत मन मोहे ॥ गल सेली विच नाग सुशोभित, तन भस्मी धारी...

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