Shri Ganga Stuti

श्री गंगा स्तोत्रम् हिन्दी में   श्री गंगा जी की स्तुति गांगं वारि मनोहारि मुरारिचरणच्युतम् । त्रिपुरारिशिरश्चारि पापहारि पुनातु माम् ॥ माँ गंगा स्तोत्रम्॥ देवि सुरेश्वरि भगवति गङ्गे त्रिभुवनतारि...

gaumata

श्री गौमाता जी की आरती हिन्दी में आरती श्री गैय्या मैंय्या की, आरती हरनि विश्‍व धैय्या की ॥ अर्थकाम सद्धर्म प्रदायिनि, अविचल अमल मुक्तिपददायिनि । सुर मानव सौभाग्य विधायिनि, प्यारी पूज्य नंद छैय्या की ...

Shri krishna

बड़ा नटखट है रे, कृष्ण कन्हैया भजन हिन्दी में   बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैया का करे यशोदा मैय्या हाँ॥ बड़ा नटखट है रे…॥ ढूंढें री अखियाँ उसे चहू ओर जाने कहाँ छुप गया नंदकिशोर॥ ढूंढें री अख...

Shri krishna

गोविंदा आला रे आला.. भजन हिन्दी में   गोविंदा आला रे आला ज़रा मटकी सम्भाल बृजबाला अरे एक दो तीन चार संग पाँच छः सात हैं ग्वाला ॥ गोविंदा आला रे…॥ आई माखन के चोरों की सेना ज़रा बच के सम्भल क...

Tulsi Mata Aarti

श्री तुलसी चालीसा हिन्दी में ॥ दोहा ॥ जय जय तुलसी भगवती सत्यवती सुखदानी । नमो नमो हरि प्रेयसी श्री वृन्दा गुन खानी ॥ श्री हरि शीश बिरजिनी, देहु अमर वर अम्ब । जनहित हे वृन्दावनी अब न करहु विलम्ब ॥ ॥ चौ...

Jai Shri Ram

श्री राम स्तुति – नमामि भक्त वत्सलं हिन्दी में   नमामि भक्त वत्सलं । कृपालु शील कोमलं ॥ भजामि ते पदांबुजं । अकामिनां स्वधामदं ॥ निकाम श्याम सुंदरं । भवाम्बुनाथ मंदरं ॥ प्रफुल्ल कंज लोचनं । ...

सूर्य भगवान जी

श्री सूर्य देव – जय जय रविदेव आरती हिन्दी में जय जय जय रविदेव, जय जय जय रविदेव । रजनीपति मदहारी, शतलद जीवन दाता ॥ पटपद मन मदुकारी, हे दिनमण दाता । जग के हे रविदेव, जय जय जय स्वदेव ॥ नभ मंडल के व...

श्री कुबेर आरती

श्री कुबेर जी आरती – जय कुबेर स्वामी हिन्दी में जय कुबेर स्वामी, प्रभु जय कुबेर स्वामी, हे समरथ परिपूरन । हे समरथ परिपूरन । हे अन्तर्यामी ॥ ॐ जय कुबेर स्वामी प्रभु जय कुबेर स्वामी.. जय कुबेर स्व...

श्यामा काली मंदिर

आज हम आपको बताएंगे ऐसे ही एक मंदिर के बारे में जो काफी रहस्यों से भरा है. यह मंदिर चिता पर बना है और दुनिया में अपने तरह का इकलौता मंदिर है. आइए इसके बारे में जानते हैं भारत में नामी मंदिरों की संख्या...

सुदामा को क्यों भोगनी पड़ी गरीबी,

कृष्ण और सुदामा की मित्रता जग जाहिर है परन्तु मन में सुदामा के सम्बन्ध में एक बड़ी शंका जरुर होगी कि एक विद्वान् ब्राह्मण अपने बाल सखा कृष्ण से छुपाकर चने कैसे खा सकता है? इस शंका का निराकरण के लिए इस ...

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