Shri Ram Stuti

श्री राम स्तुति हिन्दी में ॥दोहा॥ श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन हरण भवभय दारुणं । नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणं ॥१॥ कन्दर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुन्दरं । पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि नोमि...

Jai Shri Ram

श्री राम चालीसा हिन्दी में ॥ दोहा ॥ आदौ राम तपोवनादि गमनं हत्वाह् मृगा काञ्चनं वैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीव संभाषणं बाली निर्दलं समुद्र तरणं लङ्कापुरी दाहनम् पश्चद्रावनं कुम्भकर्णं हननं एतद्धि रामाय...

Shri Chitragupt Maharaj

श्री चित्रगुप्त चालीसा हिन्दी में ॥ दोहा ॥ सुमिर चित्रगुप्त ईश को, सतत नवाऊ शीश। ब्रह्मा विष्णु महेश सह, रिनिहा भए जगदीश॥ करो कृपा करिवर वदन, जो सरशुती सहाय। चित्रगुप्त जस विमलयश, वंदन गुरूपद लाय॥ ॥ च...

Shani Dev

श्री शनि चालीसा हिन्दी में ॥ दोहा ॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल । दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज । करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥ ॥ च...

माँ सरस्वती चालीसा

माँ सरस्वती जी की आरती हिन्दी में जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता । सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता ॥ जय जय सरस्वती माता…॥ चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी । सोहे शुभ हंस सवारी, ...

अम्बे तू है जगदम्बे काली आरती

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी आरती हिन्दी में जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी । तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥ मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को । उज्ज्वल से दोउ न...

श्री हरि स्तोत्रम्

ॐ जय जगदीश हरे आरती हिन्दी में ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे । भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे ॥ ॥ ॐ जय जगदीश हरे..॥ जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का, स्वामी दुःख बिनसे ...

Shri Ganga Maiya

श्री गंगा चालीसा हिन्दी में ॥दोहा॥ जय जय जय जग पावनी, जयति देवसरि गंग । जय शिव जटा निवासिनी, अनुपम तुंग तरंग ॥ ॥चौपाई॥ जय जय जननी हराना अघखानी । आनंद करनी गंगा महारानी ॥ जय भगीरथी सुरसरि माता । कलिमल ...

shri ganesh

जय हो जय जय है गौरी नंदन आरती हिन्दी में ॐ जय गौरी नंदन, प्रभु जय गौरी नंदन गणपति विघ्न निकंदन, मंगल निःस्पंदन || ॐ जय || ऋद्धि सिद्धियाँ जिनके, नित ही चंवर करे करिवर मुख सुखकारक, गणपति विघ्न हरे || ॐ...

Shri Hanuman

॥ श्री हनुमान चालीसा Lyrics ॥ ॥ दोहा॥ श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार । बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस ...